केले की खेती / Banana Farming 2021



केले की खेती


केले की खेती

केले की खेती  / Banana Farming


केला एक बारहमासी पौधा है जो खुद को बदल देता है। केले की खेती
केले को उगाने के लिए अधिक प्रयास की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन उच्च पैदावार प्राप्त करने के लिए कौशल, समर्पण की आवश्यकता होती है
रोपण के तरीके।  नीचे कुछ प्रासंगिक मार्गदर्शिकाएँ दी गई हैं जो किसी भी केले उत्पादकों को पता होनी चाहिए।  सूची नहीं है
संपूर्ण और निश्चित रूप से केले की विविधता के आधार पर कुछ समायोजन की आवश्यकता होती है।
केले का पौधा / बीज
केले एक बीज से नहीं बल्कि एक बल्ब या प्रकंद से बढ़ते हैं, केले की फसल के लिए बीज पुरानी फसल से निकाला जाता है। एक किसान दूसरे किसान से केले का बीज खरीदता है। क्षेत्र में किसानों के पास कई किस्म के बीज उपलब्ध हैं। कई किसान कंपनियों द्वारा संशोधित टिश्यू के पौधे लगा रहे हैं। नर्सरी से 14-15 रुपए प्रति पौधा के हिसाब से यह पौधे मिल रहे हैं। किसानों के अनुसार नर्सरी से टिश्यू कल्चर के पौधे लेने के लिए कई महीने पहले से बुकिंग कराना पड़ रही है। कंपनियां किसानों से अग्रिम रुपए लेकर बुकिंग कर रही है। जो किसान टिश्यू के पौधे लेने के लिए सक्षम नहीं है वे किसान पुरानी फसल से ही बीज निकाल रहे हैं। फसल में केले के एक पौधे के नीचे से करीब 5 बीज निकलते हैं। किसान इन बीजों को 5 रुपए प्रति बीज के हिसाब से दूसरे किसान को बेच रहे हैं।
और केले के बल्ब को बोने से लेकर फल की कटाई तक 9 से 12 महीने लगते हैं।



मिट्टी


इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों हल्की से उच्च पोषक तत्वों वाली मिट्टी में उगाया जा सकता है जैसे कि गहरी गाद चिकनी, दोमट और उच्च दोमट मिट्टी केले की खेती के लिए उपयुक्त होती है। केले की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 होनी चाहिए। केला उगाने के लिए, अच्छे निकास वाली, पर्याप्त उपजाऊ और नमी की क्षमता वाली मिट्टी का चयन करें। उच्च नाइट्रोजन युक्त मिट्टी,पर्याप्त फासफोरस और उच्च स्तर की पोटाश वाली मिट्टी में केले की खेती अच्छी होती है। जल जमाव, कम हवादार और कम पौष्टिक तत्वों वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें। रेतली, नमक वाली, कैल्शियम युक्त और अत्याधिक चिकनी मिट्टी में भी इसकी खेती ना करें।



जमीन की तैयारी


गर्मियों में, कम से कम 3 से 4 बार जोताई करें। आखिरी जोताई के समय, 10 टन अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें। ज़मीन को समतल करने के लिए ब्लेड हैरो या लेज़र लेवलर का प्रयोग करें। वे क्षेत्र जहां निमाटोड की समस्या होती है वहां पर रोपाई से पहले निमाटीसाइड और  धूमन, गड्ढों में डालें।



रोपन विधी


सबसे किफायती और कुशल रिक्ति है 1.82 मीटर x 1.52 मी। प्रति हेक्टेयर 3,630 पौधों के साथ (1.30 मीटर की एक विस्तृत रिक्ति)
पंक्तियों के बीच)।  नीचे दिया गया चित्र इस बात का अच्छा संकेत देता है कि पौधों को कैसे लगाया जाना चाहिए


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                          1.82m


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हालांकि, उपरोक्त रिक्ति केवल प्रजनन के साथ ही संभव है।  केले को 1.5 मीटर x 1.5 पर उच्च घनत्व के साथ लगाया जा सकता है
केले के लिए अपनाई गई रोपण दूरी पूरे  दुनिया के अन्य हिस्सों में भी भिन्न है।  इस अध्ययन के परिणामों से हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि दो पौधों / छेद के साथ करीबी दूरी (3x2 मीटर) पर उगाए गए केले के पौधों की खेती, सबसे अधिक उपज / प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छा रोपण दूरी है


खादें (ग्राम प्रति वृक्ष)


महीने           यूरिया           DAP          MOP


जुन             100              300            100


जुलाई         60                                  60


अगस्त        60                                  60


सितम्बर      60                                  60


औग्तेम्बर      80                                 80


नोहेम्बर        80                                 80


हानिकारक कीट और रोकथाम


फल की भुंडी : यदि फल की भुंडी का हमला दिखे तो तने के चारों तरफ मिट्टी में कार्बरील 10-20 ग्राम प्रति पौधे में डालें।


केले का चेपा : यदि इसका हमला दिखे तो मिथाइल डेमेटन 2 मि.ली या डाइमैथोएट 30 ई सी 2 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।


राइज़ोम की भुंडी : इसकी रोकथाम के लिए सूखे हुए पत्तों को निकाल दें और बाग को साफ रखें। रोपाई से पहले राइज़ोम को मिथाइल ऑक्सीडेमेटन 2 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में डुबो दें। रोपाई से पहले केस्टर केक 250 ग्राम या कार्बरील 50 ग्राम या फोरेट 10 ग्राम प्रति गड्ढे में डालें।


थ्रिप्स : इसकी रोकथाम के लिए मिथाइल डेमेटन 20 ई सी 2 मि.ली. या मोनोक्रोटोफॉस 36 डब्लयु एस सी 2 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।


बीमारियां और रोकथाम


सिगाटोका पत्तों पर धब्बा रोग : प्रभावित पत्तों को निकालें और जला दें। जल जमाव हालातों के लिए खेत में से पानी के निकास का उचित प्रबंध करें।


किसी एक फंगसनाशी जैसे कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम या मैनकोजेब 2 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2.5 ग्राम या ज़ीरम 2 मि.ली. या क्लोरोथालोनिल 2 ग्राम को प्रति लीटर पानी मे मिलाकर स्प्रे करें। घुलनशील पदार्थ जैसे सैंडोविट, टीपॉल 5 मि.ली. को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे में मिलायें।


एंथ्राक्नोस : यदि इसका हमला दिखे तो कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2.5 ग्राम  या बॉर्डीऑक्स मिश्रण 10 ग्राम या क्लोरोथालोनिल फंगसनाशी 2 ग्राम या कार्बेनडाज़िम 1 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।


पनामा बीमारी : यदि इसका हमला खेत में दिखे तो विभिन्न तरह के प्रभावित पौधों को उखाड़े और खेत से दूर ले जाकर नष्ट कर दें। उसके बाद चूना 1-2 किलो गड्ढों में डालें।


रोपाई से पहले जड़ों को कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में डुबोयें और रोपाई के  6 महीने  कार्बेनडाज़िम छिड़कें ।


गुच्छे बनना : यह चेपे के हमले के कारण होता है। पौधे के प्रभावित भागों को निकालें और खेत से दूर ले जाकर नष्ट कर दें। यदि खेत में चेपे का हमला दिखे तो डाइमैथोएट 20 मि.ली. को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।


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